लालबागचा राजा 2026 गणेशोत्सव कब से शुरू होगा?
सबसे पहले तारीखों की बात करते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इसी दिन से लालबागचा राजा का दर्शन भी शुरू होगा। वहीं दूसरी ओर, गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को होगा। नतीजतन, भक्तों को इस बार दर्शन के लिए करीब 12 दिन का समय मिलेगा। बल्कि, यह अवधि पिछले कुछ सालों की तुलना में थोड़ी लंबी है। इसलिए, दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए यह राहत की बात है।
श्री गणेश मुहूर्त पूजन: तैयारियां कब शुरू हुईं?
गौरतलब है कि लालबागचा राजा की तैयारियां महीनों पहले शुरू हो जाती हैं। दरअसल, 9 जून 2026 को मंडल ने पारंपरिक "श्री गणेश मुहूर्त पूजन" संपन्न किया। यह पूजा सुबह 5 बजे मंडल अध्यक्ष बालासाहेब कांबले ने की। साथ ही, कोषाध्यक्ष मंगेश दळवी ने रसीद बहियों की पूजा की। इस तरह, आधिकारिक रूप से गणेशोत्सव 2026 की तैयारियों का आगाज़ हो गया। फिर, अगले कुछ महीनों में मूर्ति निर्माण से लेकर पंडाल सजावट तक का काम पूरा किया जाता है।
93 साल की परंपरा: लालबागचा राजा का इतिहास
अब जरा इतिहास पर नजर डालते हैं। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 1934 में हुई थी। उस समय इसे "सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल, लालबाग" कहा जाता था। दरअसल, कोली समुदाय के मछुआरों ने इसकी नींव रखी थी। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। असल में, 1932 में पेरू चॉल का बाजार बंद कर दिया गया था। नतीजतन, मछुआरे और विक्रेता बेघर हो गए थे। इसलिए, उन्होंने गणेश जी से एक स्थायी बाजार स्थल की मन्नत मांगी। कुंवरजी जेठाभाई शाह, श्यामराव विष्णु बोधे और अन्य स्थानीय लोगों की मदद से जमींदार राजाबाई तैय्यबली एक भूखंड देने को राजी हुए। इसके बाद, कृतज्ञता स्वरूप 12 सितंबर 1934 को गणेश मूर्ति की स्थापना की गई। वहीं, 2026 में यह मंडल अपने अस्तित्व के 93वें वर्ष में प्रवेश करेगा। बल्कि, यह मुंबई की सबसे पुरानी और सबसे प्रतिष्ठित गणेशोत्सव परंपराओं में से एक बन चुकी है।
नवसाचा गणपति: मनोकामना पूरी करने वाले गणेश
लालबागचा राजा को "नवसाचा गणपति" भी कहा जाता है। इसका अर्थ है मनोकामना पूरी करने वाले गणेश। दरअसल, भक्तों की गहरी आस्था है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी वजह से, हर साल लाखों लोग यहां दर्शन के लिए उमड़ते हैं। वहीं, त्योहार के 10 दिनों के दौरान रोजाना 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु मूर्ति के दर्शन क्षेत्र में पहुंचते हैं। साथ ही, हर साल कुल मिलाकर करोड़ों भक्त लालबाग पहुंचते हैं। इसलिए, इसे मुंबई की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
मूर्ति निर्माण: कांबली आर्ट्स की भूमिका
मूर्ति निर्माण की कहानी भी उतनी ही रोचक है। रत्नाकर कांबली एक जाने-माने मूर्तिकार थे। उन्होंने 1935 में पहली बार मूर्ति बनाने की जिम्मेदारी संभाली थी। असल में, कुछ दोस्तों ने आयोजकों को उनका नाम सुझाया था। इसके बाद, 1952 में उनके निधन पर बेटे वेंकटेश ने काम आगे बढ़ाया। फिर, 2002 में रत्नाकर कांबली जूनियर ने यह विरासत संभाली। वर्तमान में भी कांबली आर्ट्स ही यह मूर्ति तैयार करता है। दरअसल, मूर्ति के हिस्से पहले कार्यशाला में बनाए जाते हैं। इसके बाद, उन्हें दर्शन क्षेत्र में लाकर जोड़ा और रंगा जाता है। अंत में, रत्नाकर पंडाल में जाकर खुद मूर्ति की आंखें बनाते हैं। यह परंपरा आज भी कायम है। साथ ही, मूर्ति की ऊंचाई आमतौर पर 5 से 6 मीटर के बीच रहती है।
दर्शन के प्रकार: मुख दर्शन और चरण स्पर्श दर्शन
भक्तों के लिए दर्शन के दो मुख्य विकल्प उपलब्ध रहते हैं। पहला है मुख दर्शन, जिसमें भक्त गणेश जी का चेहरा देख सकते हैं। दूसरा है चरण स्पर्श दर्शन, जिसमें भक्तों को मूर्ति के चरण छूने का मौका मिलता है। हालांकि, इसके लिए अधिक समय लगता है। आमतौर पर, हर भक्त को दर्शन में 10 से 15 मिनट का समय मिलता है। वहीं, प्रवेश के लिए दो प्रमुख द्वार होते हैं। सिद्धि गेट से मुफ्त प्रवेश मिलता है। जबकि, ऋद्धि गेट से भुगतान करके तेज़ दर्शन की सुविधा मिलती है। इसलिए, समय बचाने के इच्छुक भक्त ऋद्धि गेट का विकल्प चुन सकते हैं।
दर्शन का समय और पूजा-आरती की समय सारिणी
अब बात करते हैं रोज़ाना के समय की। पारंपरिक रूप से दर्शन सुबह 5 बजे शुरू होता है। फिर, यह रात 11 बजे तक चलता है। साथ ही, दिन में तीन बार पूजा होती है। सुबह की पूजा 6 से 7 बजे के बीच होती है। दोपहर की पूजा 1 से 2 बजे तक चलती है। वहीं, शाम की पूजा 7 से 8 बजे के बीच संपन्न होती है। इसके अलावा, तीन आरतियां भी होती हैं। सुबह की आरती 7 से 7:15 बजे तक होती है। दोपहर की आरती 1 से 1:15 बजे तक चलती है। शाम की आरती 7 से 7:15 बजे के बीच होती है। हालांकि, हर साल इन समयों में थोड़ा बदलाव संभव है। इसलिए, दर्शन पर जाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज ज़रूर देखें।
First Look Lalbaugh Ka Raja : Watch
लाइव दर्शन: घर बैठे कैसे करें दर्शन?
हर कोई मुंबई जाकर दर्शन नहीं कर सकता। इसलिए, मंडल ने ऑनलाइन लाइव दर्शन की सुविधा भी दी है। दरअसल, लालबागचा राजा मंडल यूट्यूब से सिल्वर बटन पाने वाला पहला गणेश मंडल है। साथ ही, भक्त फेसबुक, इंस्टाग्राम और आधिकारिक वेबसाइट पर भी 24 घंटे लाइव दर्शन देख सकते हैं। नतीजतन, विदेश में बसे भारतीय भी इस उत्सव से जुड़ पाते हैं। इसके अलावा, कई टेलीकॉम और ओटीटी प्लेटफॉर्म भी हर साल मुफ्त लाइव दर्शन की सुविधा देते हैं। इसलिए, अगर मुंबई जाना संभव नहीं है, तो यह विकल्प जरूर आजमाएं।
आप आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों पर लाइव दर्शन का लाभ उठा सकते हैं।
- आधिकारिक वेबसाइट:
www.lalbaugcharaja.com - यूट्यूब चैनल: लाल बाग का राजा का आधिकारिक यूट्यूब चैनल
- lalbaugcha raja location : GMAP
विसर्जन: भावुक विदाई का पल
गणेशोत्सव का सबसे भावुक पल विसर्जन का होता है। इस साल विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को होगा। दरअसल, यह दिन अनंत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मूर्ति को गिरगांव चौपाटी पर अरब सागर में विसर्जित किया जाता है। साथ ही, पूरे मुंबई शहर में ढोल-ताशों की गूंज सुनाई देती है। वहीं, "गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" के नारों से माहौल भक्तिमय हो जाता है। हालांकि, कई बार समुद्र में ज्वार-भाटे और तकनीकी कारणों से विसर्जन में देरी भी होती है। इसलिए, भक्तों को धैर्य रखने की सलाह दी जाती है।
भक्तों के लिए जरूरी सुझाव
- दरअसल, भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी दर्शन के लिए जाएं।
- इसके अलावा, गर्मी और भीड़ को देखते हुए पानी की बोतल साथ रखें।
- साथ ही, कीमती सामान और गहने ले जाने से बचें।
- वहीं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ जाने पर अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- इसलिए, यात्रा से पहले नजदीकी लोकल स्टेशन और मेट्रो रूट की जानकारी जरूर लें।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. लालबागचा राजा 2026 का दर्शन कब से शुरू होगा?
दर्शन 14 सितंबर 2026, सोमवार से शुरू होगा। यह गणेश चतुर्थी का दिन है।
2. लालबागचा राजा का विसर्जन कब होगा?
विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा।
3. लालबागचा राजा की स्थापना कब हुई थी?
इसकी स्थापना 1934 में कोली समुदाय के मछुआरों ने की थी। 2026 में मंडल अपने 93वें वर्ष में प्रवेश करेगा।
4. लालबागचा राजा को नवसाचा गणपति क्यों कहा जाता है?
भक्तों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। इसी कारण इसे नवसाचा गणपति कहा जाता है।
5. लालबागचा राजा का लाइव दर्शन कहां देख सकते हैं?
भक्त आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी लाइव दर्शन देख सकते हैं।
6. दर्शन के लिए कौन-कौन से गेट उपलब्ध हैं?
सिद्धि गेट से मुफ्त प्रवेश मिलता है, जबकि ऋद्धि गेट से भुगतान करके तेज़ दर्शन की सुविधा मिलती है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई तारीखें और समय सामान्य पंचांग व उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। दर्शन समय, गेट व्यवस्था और अन्य विवरणों में स्थानीय प्रशासन या मंडल की ओर से बदलाव संभव है। दर्शन के लिए जाने से पहले कृपया आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।
